जैसे ही हीरे का नाम आता है सबके मन में एक ही ख्याल आता है स्टेटस सिंबल, पैसा, ये अभी से नहीं जबसे हीरे की खोज हुए है तबसे ही दुनिया की पहली पसंद बना हुआ है| महिलाओ को तो ये बहुत पसंद होता ही है पुरुष भी इसके आकर्षण से बच नहीं पाते है| आज हम हीरे के ज्योतिषीय गुणों के बारे में बात करने वाले है| हीरे का ज्योतिष में भी बहुत महत्तव है परंतु वर्तमान स्पर्धा के समय में ये स्टेटस सिम्बल ज्यादा बन गया है| परंतु लोग भूल जाते है की हीरे का महत्त्व उसमे मौजूद किरण रश्मियों की गुणवत्ता और प्रभवशीलता के कारण होता है|
कहा जाता है की शादी का रिश्ता 7 जन्मो का होता है| ७ जन्म न सही हमे हमारी पूरी जिंदगी साथ गुजारनी होती है और जब हम किसी को अपना जीवनसाथी बनाते है तो सिर्फ हमारा रिश्ता नहीं होता हमारा पूरा परिवार एक रिश्ते में बंध जाता है और अगर ये रिश्ता सही से नहीं चलता है तो परेशानियां हमारे सारे परिवार को उठानी पड़ती है|
स्त्री हो या पुरुष हम जिस से भी दोस्ती करने जा रहे है या कोई भी सम्बन्ध बनाने जा रहे है हमारे मन में हमेशा ये शंका रहती है की वो व्यक्ति केसा होगा एवं हमारे बिच सामंजस रहेगा या नहीं या फिर हम झगड़ते रहेगे और हमारी दोस्ती या सम्बन्ध ज्यादा दिन चलेगा भी या नहीं क्योकि ये ऐसे रिस्ते होते है जो हमे बहुत ही सोच समझ के बनाने चाहिए अगर दोस्त अच्छा हो तो जिंदगी संवार देता है और हमारे जीवन के हर पड़ाव पर हमारा साथ देता है| Continue reading →
रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 7 अगस्त, रविवार को है। इस दिन नागों की पूजा करने का विधान है। हिंदू धर्म में नागों को भी देवता माना गया है। महाभारत आदि ग्रंथों में नागों की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है। इनमें शेषनाग, वासुकि, तक्षक आदि प्रमुख हैं। आज नागपंचमी के अवसर पर हम आपको ग्रंथों में वर्णित प्रमुख नागों के बारे में बता रहे हैं-
जैसा की हम आपको सावन माह की शुरुआत से ही बताते आ रहे है की इस महीने में शिव जी को प्रसन्न करना बहुत ही आसान होता है परंतु अब श्रावण (सावन) मास के कुछ ही दिन शेष बचे हैं। 18 अगस्त, गुरुवार को भगवान शिव का प्रिय सावन मास समाप्त हो जाएगा। इसलिए जितनी हो सके शिव जी की आराधना एवं अभिषेक करे ताकि उनकी कृपा आप पर बनी रहे| Continue reading →
नाग पंचमी ७ अगस्त को है तो लोगो ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी है क्योंकि ये ऐसे त्यौहार है जब लोग अपनी अपनी परेशानियां एवं कुंडली के दोष दूर करने के लिए नाग देवता की पूजा करवाते है| हिन्दू धर्म में नाग को देवता की उपाधि दी गई है एवं उनकी पूजा भी की जाती है| Continue reading →
जैसा की आप सभी जानते है की सावन का पवित्र महीना चल रहा है| इस महीने में हम शिव जी को प्रसन्न तो कर ही सकते है साथ ही कल ऐसा पवित्र दिन है जब आप लक्ष्मी जी को प्रसन्न कर सकते है| कल के दिन आप लक्ष्मी जी को प्रसन्न करके धन लाभ के बहुत सारे योग बना सकते है| लक्ष्मी जी आपको धन प्राप्ति के साथ साथ जमीन संबंधी लाभ भी करवा सकती है|
कई लोग होते है जिनके पास धन और संपत्ति की कोई कमी नहीं होती है एवं वो धर्म ग्रंथो एवं लक्ष्मि जी के पूजा को दकियानूसी एवं पुरानी बातें मानते है| ऐसे लोग लक्ष्मि जी के प्रकोप से ज्यादा दिन तक बच कर नहीं रह सकते है| जैसे की लक्ष्मि जी अपने भक्तो को धनवान बनाती है वैसे ही उनकी पूजा एवं धार्मिक कार्यो को दकियानूसी मानाने वालो को कंगाल भी बना देती है| Continue reading →
हम सभी कर्म करते है सफलता के लिए एवं अपने कार्य की पूर्ति या किसी मनचाहे वस्तु की प्राप्ति के लिए| परंतु ऐसा बहुत ही काम होता है की सभी को सफलता प्राप्त हो कई लोग सफल हो जाते है कई लोग नहीं| कहावत भी है की कर्म किये जा फल की इच्छा मत कर पर ऐसा करना कोई नहीं चाहता सभी सफलता चाहते है| कल कामिका एकादशी है| अगर आप नीचे बताये गए ये ११ उपये करते है तो आपको सफलता अवश्य मिलेगी|
सम्मोहन शक्ति एवं धन प्राप्ति ये दो ऐसी चीजे है जिसके पीछे वर्तमान का हर एक युवा लगा हुआ है| सिर्फ युवा ही नहीं हर एक इंसान ये शक्तिया प्राप्त करना चाहता है| इन शक्तियों के बारे में रावण-संहिता में विस्तार से लिखा गया है| हम सभी अभी तक रावण को एक बुरे इंसान एवं राक्षस प्रवत्ति का ही मानते है परंतु रावण एक बहुत ही बड़ा विध्वान था जिसने शिव जी को अपनी तपस्या से कई बार प्रसन्न किया| रावण ने ज्योतिष-तंत्र के लिए एक वृहद शास्त्र का लेखन किया एवं उसमे सभी शक्तियों की प्राप्ति के उयाये लिखे है|
ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत मानव जीवन से जुड़ी हर वस्तु को किसी न किसी ग्रह से जोड़ा गया है, एवं मनुष्य के शरीर के सभी अंगो को कुंडली के ग्रहो से जोड़ा गया है| हमारे शरीर के भाग कुंडली के अलग अलग भावो से सम्बन्ध रखते है| इसलिए जो भी वास्तु हम उस भाग में धारण करते है उस से हमारे भाग्य पर असर होता है वो अच्छा भी हो सकता है एवं बुरा भी|
हम सभी जानते है की सावन के इस पवित्र महीने मे शिव जी को प्रसन्न करना बहुत ही आसान होता है| शिव जी को कुछ वस्तुए अत्यंत प्रिय है जिनमे उनका त्रिशूल, डमरू एवं रुद्राक्ष शामिल है| रुद्राक्ष के बारे में हम सभी जानते हैं। भगवान शिव इसे आभूषण के रूप में पहनते हैं। रुद्राक्ष के बिना महादेव का श्रंगार ही अधूरा माना जाता है। शिवपुराण की विद्येश्वर संहिता में रुद्राक्ष के 14 प्रकार बताए गए हैं। एकमुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला कभी गरीब नहीं होता, उस पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है, ऐसा शिवपुराण में लिखा है।

