24 जून शनिश्चरी अमावस्या, राशि अनुसार इस प्रकार करें शनि पूजन

२३ जून को शनि राशि परिवर्तित कर रहा है और २४ जून अर्थात शनिवार के दिन अमावस्या है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा संयोग बहुत ही शुभ माना गया है। शनिवार की अमावस्या का महत्त्व बहुत अधिक है। जिसे शनिश्चरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। आज हम जानेंगे किन राशि को कौन से उपाय करना चाहिए इस शनिवार की अमावस्या के दिन।

१) मेष राशि:

इस राशि वाले शनि अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व अर्थात ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके सवा किलो बाजरा मिटटी के बर्तन में भरें और उसके ऊपर सरसों के तेल का चौमुख दीपक प्रज्वलित करें। तत्पश्च्यात आसान पर बैठकर शनि मंत्र का पांच माला जप करें। जप के बाद उस बाजरे को 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग व्यक्ति को दान करें। श्रद्धापूर्वक गरीब व् जरूरतमंद को उपयोग सम्बंधित कुछ दान करें।

शनि मंत्र: ॐ  प्रां प्रीं प्रौं स: शनेय नम:

२) वृषभ राशि:

इस राशि वाले शनि अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व अर्थात ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके सवा किलो अरहर(तुवर) की दाल मिटटी के बर्तन में भरें और उसके ऊपर सरसों के तेल का चौमुख दीपक प्रज्वलित करें। तत्पश्च्यात आसान पर बैठकर शनि मंत्र का पांच माला जप करें। जप के बाद दाल को 9 साल से काम उम्र की कन्या को दान करें। बरगद या पीपल के पेड़ के समक्ष स्नान करके कड़वे तेल से दियें प्रज्वलित करें। जल और दूध को मिलकर पेड़ को अर्पित करें। फिर उसी जगह की मिटटी से तिलक करें।

शनि मंत्र: ॐ  प्रां प्रीं प्रौं स: शनेय नम:

३) मिथुन राशि:

इस राशि वाले शनि अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके सवा किलो साबुत मुंग को हरे कपडे में बांधकर साफ बर्तन में रखें और उस बर्तन को घर के मंदिर में रखें। उसके ऊपर सरसों के तेल का चौमुख दीपक प्रज्वलित करें। तत्पश्च्यात आसान पर बैठकर शनि मंत्र का ग्यारह माला जप करें। जप पश्च्यात उस मुंग को 60 वर्ष से अधिक उम्र के किन्नर को दक्षिणा सहित दान करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। इस अमावस्या के दिन श्रद्धापूर्वक बाजरा गौशाला को दान करें। ऐसा करने से काम सम्बंधित समस्या का निवारण होगा तथा परिवार के स्वस्थ्य सम्बंधित परेशानियां दूर होंगी।

शनि मंत्र: ॐ  नमो भगवते शनैश्चराय सूर्यपुत्राय नम:।

४) कर्क राशि:

शनि अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके सवा किलो अखंडित चावल को किसी मिट्टी के पात्र के ऊपर सवा मीटर स्वच्छ सफेद कपड़े में रखें। फिर उस बर्तन को पूजा स्थल पर रखें और सरसों के तेल से चौमुख दीपक प्रज्वलित करें। फिर आसान पर बैठकर शनि देव का ध्यान करें। और उसके बाद शनि मंत्र की पांच माला जप करें। जप पश्च्यात चावल को वस्त्र के साथ किसी कुष्ठ रोगी को दक्षिणा के साथ दान करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। इसी अमावस्या के दिन ही गौशाला में देसी चने दान करें।

शनि मन्त्र:

ह्रीं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।

छायामात्र्ताण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।

५) सिंह राशि:

इस राशि वाले सबसे पहले ब्रह्मा मुहूर्त पे उठकर स्नान आदि करके एक मिट्टी के बर्तन में सर्वप्रथम सवा मीटर साफ लाल कपड़े के ऊपर सवा किलो गेहूं से उस मिट्टी को भरें। और उसके बाद उसे पूजा स्थल पर रखें। फिर सरसों के तेल से चौमुख दीपक को प्रज्वलित करें। शनिदेव का ध्यान करते हुए उनका पूजन करें। तत्पश्च्यात शनि मंत्र का जप करें जो की पांच माला होनी चाहिए। उसके बाद उस गेहूं को वस्त्र सहित दक्षिणा के साथ कुष्ठ रोगी को दान करें और आशीर्वाद प्राप्त करें। गौशाला में सरसों की खली का दान करें।

शनि मंत्र:  

सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय।

मन्दचार: प्रसन्नात्मा पीड़ां हरतु मे शनि:।।

६) कन्या राशि:

इस राशि वाले भी सबसे पहले ब्रह्मा मुहूर्त पे उठकर स्नान आदि करके एक मिट्टी के बर्तन में सर्वप्रथम सवा मीटर साफ हरे कपड़े के ऊपर सवा किलो मशरूम रखें। और उसके बाद उसे पूजा स्थल पर रखें। फिर सरसों के तेल से चौमुख दीपक को प्रज्वलित करें। शनिदेव का ध्यान करते हुए पंचोपचार पूजन करें। तत्पश्च्यात शनि मंत्र का 7 माला जप करें। उसके बाद मशरूम के साथ पात्र और कपड़े किसी किन्नर को दक्षिणा के साथ दान करें।

शनि मंत्र:  ॐ  प्रां प्रीं प्रौं शं शनैश्चराय नम:।

७) तुला राशि:

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर इस राशि वाले स्नान आदि करके सर्वप्रथम एक सफेद कपड़े को कांसे के बर्तन में रखें और उसके बाद उस बर्तन में सवा किलो जौ भरें। फिर उसे पूजा स्थल पर रखें। फिर सरसों के तेल से चौमुख दीपक को प्रज्वलित करें। उसके बाद शनि देव का ध्यान करते हुए पंचोपचार पूजन करें। और शनि मंत्र का 7 माला जप करें। जप पश्च्यात जौ को पात्र और वस्त्र के साथ किसी विधवा स्त्री को दक्षिणा सहित दान करें। उनका आशीष प्राप्त करें। श्रद्धापूर्वक गेहूं को मंदिर में दान करें।

शनि मंत्र: ॐ  शं शनैश्चराय नम:।

८) वृश्चिक राशि:

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर इस राशि वाले भी स्नान आदि करके सर्वप्रथम एक स्वच्छ लाल कपड़े को तांबे के बर्तन में रखें और उसके बाद उस बर्तन में सवा किलो साबुत मसूर भरें। फिर उसे पूजा स्थल पर रखें और सरसों के तेल से चौमुख दीपक को प्रज्वलित करें। उसके बाद शनि देव का ध्यान करते हुए उनका पूजन करें। शनि मंत्र का 5 माला जप करें। जप पश्च्यात मसूर को पात्र और वस्त्र के साथ किसी सफाई कर्मचारी को दक्षिणा सहित दान करें। उनका आशीष प्राप्त करें। इसी अमावस्या के शाम के समय लगभग 5 से 6 के बीच सवा किलो त्रिचोली अर्थात गेहूं, चावल का आटा और शकर बुरा के मिक्स को चीटियों को डालें।

शनि मंत्र:

ॐ  शं शनैश्चराय नम: ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिया।

कंटकी कलही चाथ तुरंगी महिषी अजा ॐ  शं शनैश्चराय नम:।।

९) धनु राशि:

इस राशि के जातक सर्वप्रथम ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके पांच किलो चने की दाल को पिले कपड़े में बांधकर अपने पूजा स्थल पर रखें। फिर चौमुख दीपक को सरसों के तेल से मंदिर में प्रज्वलित करें। और शनिदेव का ध्यान करते हुए उनका पूजन करें। फिर आसान पर बैठकर शनि मंत्र की 5 माला का जप करें। फिर उस चने की दाल को दक्षिणा के साथ किसी पिंगल खाने में दान करें। किसी मंदिर में श्रद्धापूर्वक मक्का दान करें।

शनि मंत्र: ऊं शं वज्रदेहाय नम:

१०) मकर राशि:

इस राशि के जातक सर्वप्रथम ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके पांच किलो देसी चने को नीले कपड़े में बांधकर अपने पूजा स्थल पर रखें। फिर चौमुख दीपक को सरसों के तेल से मंदिर में प्रज्वलित करें। और शनिदेव का ध्यान करते हुए उनका पूजन करें। फिर आसान पर बैठकर शनि मंत्र की 11 माला का जप करें। फिर उस चने को वस्त्र और दक्षिणा के साथ किसी ब्राह्मण को दान करें। इस दिन गरीब जरूरतमंदों के लिए भंडारे की व्यवस्था करें।

शनि मंत्र: ॐ  शं सर्वारिष्ट विनाशने।

११) कुंभ राशि:

इस राशि के जातक सर्वप्रथम ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके पांच किलो उड़द को सवा पांच मीटर काले कपड़े में बांधकर अपने पूजा स्थल पर रखें। फिर चौमुख दीपक को सरसों के तेल से मंदिर में प्रज्वलित करें। और शनिदेव का ध्यान करते हुए उनका पूजन करें। फिर आसान पर बैठकर शनि गायत्री मंत्र की 11 माला का जप करें। जप पश्च्यात उस उड़द को वस्त्र सहित किसी गौशाला या मंदिर को दान करें।

शनि मंत्र: ॐ  भगभवाये विद्महे मृत्युरुपाय धीमही तन्नो शनि प्रचोदयात्॥

१२) मीन राशि:

इस राशि के जातक सर्वप्रथम ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके ८ किलो सरसों के तेल को लोहे के पत्र में भरकर उसे सवा मीटर स्वच्छ पिले कपड़े पे पूजा स्थल पर रखें। फिर चौमुख दीपक को सरसों के तेल से पूजा स्थल पर प्रज्वलित करें। और शनिदेव का ध्यान करते हुए उनका पूजन करें। फिर आसान पर बैठकर शनि की 5 माला का जप करें। जप पश्च्यात यह तेल मंदिर में दक्षिणा के साथ दान करें।

शनि मंत्र: ऊं ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नम:

 

ये समस्त जानकारियां ज्योतिष शास्त्र के अनुसार है|

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