वाहन पूजन

जब हम कोई नया वाहन खरीदने की सोचते हैं, तो हमारे बड़े बुजुर्ग उसे हमेशा एक शुभ मुहूर्त पर खरीदने तथा उसे इस्‍तेमाल करने से पहले उसकी पूजा करने के लिए कहते हैं। ताकि वो एक सकारात्मक ऊर्जा के साथ घर पर आये और हमेशा आपके लिए सुरक्षित रहे।
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ज्योतिष में भी यही माना जाता हैं कि अगर आप कोई नया वाहन खरीदते हैं तो उसका पूजन अवश्य करना चाहिए, इसे शुभ माना गया हैं। शास्त्रों में स्वस्तिक के निशान का बहुत महत्व बताया गया है, इसे वाहन पर अवश्य लगाना चाहिए । स्वस्तिक का निशान सकारात्मक ऊर्जा का प्रतिक है, इसको लगाने से यात्रा में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आता।
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पूर्ण विधि विधान से की गयी वाहन पूजा हमारे वाहन की तथा हमारी हमेशा रक्षा करती हैं व भविष्य में होने वाली किसी भी अनहोनी से हमको बचाती हैं।
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इंगेजमेंट यानी सगाई एक रस्म है, जिसे विवाह सस्ंकार से पहले किया जाता है। सगाई का अर्थ हैं कि विवाह के लिए वर और कन्या को एक दूसरे के लिए रोक देना, इसी कारण से सगाई की इस रस्म को रोका भी कहा जाता है। शास्त्रों में सगाई के लिए शब्द है – वरण। कन्या वरण और वर वरण ।
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शास्त्रों में सगाई रस्म के लिए शुभ मुहूर्त दिए गए हैं, हमें उन्हीं के अनुसार शुभ मुहूर्त में सगाई की रस्म को सम्पन्न करना चाहिए। सगाई की रस्म शुरु करने के लिए सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें तथा पूर्व दिशा की ओर मुख कर आसन पर वर या कन्या के बैठने के लिए स्थान रखें।
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श्री गणेश का पूजन करने के बाद ही आगे की सारी रस्मे पूर्ण विधि विधान से सम्पन्न करनी चाहिए, जिससे की इस नए जोड़े के नए जीवन की शुरुआत अच्छे से बिना किसी बाधा के हो व जीवन में सद्भाव, शांति और खुशियाँ हमेशा बनी रहे।
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श्राद्ध

आज से पितृ पूजा का पर्व श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहा है, जिसमे लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्‍मा की शांति के लिए श्राद्ध या पिंडदान करते हैं। मान्‍यता है कि अगर पितृ नाराज हो जाएं तो व्‍यक्ति का जीवन भी खुशहाल नहीं रहता और उसे कई तरह की समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है, यही नहीं घर में अशांति फैलती है और व्‍यापार व गृहस्‍थी में भी हानि झेलनी पड़ती है। ऐसे में अपने पितरों को तृप्‍त करना और उनकी आत्‍मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध करना जरूरी माना जाता है। श्राद्ध के जरिए पितरों की तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है और पिंड दान व तर्पण कर उनकी आत्‍मा की शांति की कामना की जाती है। जिसे पितृ दोष निवारण पूजा भी कहा जाता हैं।

हिन्‍दू पंचांग के मुताबिक पितृ पक्ष अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ते हैं। इसकी शुरुआत पूर्णिमा तिथि से होती है, जबकि समाप्ति अमावस्या पर होती है आमतौर पर पितृ पक्ष 16 दिनों का होता है, इस बार पितृ पक्ष 13 सितंबर से शुरू होकर 28 सितंबर को खत्म होगा । इन दिनों में पितरों के लिए शुभ काम किए जाते हैं।

ध्यान रहे की पितृ पक्ष में सभी तिथियों का अलग-अलग महत्व है। आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु जिस तिथि पर होती है, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। यानी कि अगर परिजन की मृत्‍यु प्रतिपदा के दिन हुई है तो प्रतिपदा के दिन ही श्राद्ध करना चाहिए।

पितृ पक्ष में किस दिन करें श्राद्ध? श्राद्ध के नियम क्या हैं? श्राद्ध कैसे करें? इस प्रकार की सभी जानकारियों तथा श्राद्ध (पितृ पूजा) कराने के लिए शहर के सबसे विद्वान पुरोहित को बुक करने के लिए अभी कॉल करें 📲 +91-900-9444-403 या कॉलबैक के लिए अपना मोबाइल नंबर कमेंट करें..!

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MyPanditG

हर एक व्यक्ति चाहता है कि उसकी जिंदगी में धन-दौलत की कभी कमी ना हो और उसके लिए वो पूरी मेहनत भी करता हैं ताकि पैसे कमा सके. लेकिन कहते हैं ना की पैसे कमाना तो कठिन काम है ही लेकिन पैसे संभाल कर रखना उससे भी कठिन काम होता है।
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कई बार जरूरी कामों के लिए हमारे पास पैसे नहीं होते और हमें कर्ज या ऋ़ण लेने पड़ जाते हैं लेकिन ये कर्ज कभी खत्म होने का नाम ही नहीं लेते और ज़िंदगी भर ले लिए हमारे लिए मुसीबत बन जाते है।
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ज्योतिष में कुछ ऐसे अचूक उपाय है जिन्हें अपनाकर कोई भी व्यक्ति जल्दी से जल्दी सर पर चढ़े इन कर्जो से आसानी से छुटकारा पा सकता हैं। अगर आप भी अपने कभी न चुकाने वाले कर्ज या ऋ़ण से परेशान हैं तो तुरंत हमसे संपर्क करें 📲 +91-900-9444-403 या कॉलबैक के लिए अपना मोबाइल नंबर कमेंट करें..!
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किसी भी प्रकार की धर्मिक पूजा, पाठ , हवन, मुहूर्त, कथा व विवाह कराने हेतु ऑनलाइन पंडित जी बुक करें या इनसे सम्बंधित किसी भी प्रकार की सहायता के लिए हमें कॉल करें 📲 +91-900-9444-403 या कॉलबैक के लिए अपना मोबाइल नंबर कमेंट करें..!
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गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया
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गणपति बप्पा एक विघ्नहर्ता हैं, जो जीवन में आई सभी परेशानियों, बाधाओं और कठिनाइयों को दूर करते हैं। उनके पूजन को पूर्ण विधि विधान से करने पर व्यक्ति की पर्सनल तथा प्रोफेशनल दोनों जीवन में खुशहाली आती है।
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गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर गणपति बप्पा की स्थापना व विसर्जन पूजन पूर्ण विधि विधान से करने के लिए आज ही अपनी बुकिंग करें, विजिट करें 🌍 www.mypanditg.com/shop/ganpati-chaturthi-pujan
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नया घर ज़िंदगी का सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट होता हैं, तो गृह प्रवेश भी पूरी विधि विधान से होना चाहिए ताकि इस नए घर में आपकी जिंदिगी में खुशियाँ ही खुशियाँ आये और सभी प्रकार के दुःख, दर्द तथा बाधाएँ आपके घर से हमेशा दूर रहे।
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गृह प्रवेश के समय श्री गणेश पूजा, नवग्रह पूजा (नौ ग्रहों की पूजा) तथा वास्तु भगवान पूजा करना आपके नए घर में खुशहाली व सुख समृद्धि लाता है। साथ ही इसमें रहने वाले सदस्यों के जीवन में शांति, अच्छी किस्मत और सद्भाव लाता है।
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गृह प्रवेश पूजा व मुहूर्त की शुभ तिथियों से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए कॉल करें 📲 +91-900-9444-403 या कॉलबैक के लिए अपना मोबाइल नंबर कमेंट करें..!
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हनुमान चालीसा श्री तुलसीदास जी द्वारा रचयीत है, हनुमान चालीसा में प्रभु श्री राम जी के महान भक्त हनुमान जी के कार्यों एवं गुणों का वर्णन किया गया है, जो निम्न चौपाइयों के द्वारा वर्णित हैं | नित दिन हनुमान चालीसा पढ़ने से आप देखेंगे की आपको अपने आप में कॉन्फिडेंस बढ़ता दिखेगा है, पॉजिटिव एनर्जी आती दिखेगी है, अपने कार्य स्थल पर अच्छा मन लगता है, और अपने कार्य क्षेत्र में पदोन्नोती मिलती है | लगातार १०१ दिन तक हनुमान चालीसा पढ़ते रहे आपको सफलता अवश्य मिलेगी, बोलो श्री राम भक्त हनुमान जी की जय…

जय श्री राम

हनुमान चालीसा

                                                     

दोहा

श्रीगुरु चरण सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि |

बरनऊँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ||

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार |

बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार ||

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर |

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर || १ ||

राम दूत अतुलित बल धामा |

अंजनी पुत्र पवनसूत नामा || २ ||

महाबीर बिक्रम बजरंगी |

कुमति निवार सुमति के संगी || ३ ||

कंचन बरन बिराज सुबेसा |

कानन कुण्डल कुंचित केसा || ४ ||

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे |

काँधे मूँज जनेऊ साजे || ५ ||

शंकर सुवन केसरी नंदन |

तेज प्रताप महा जगवंदन || ६ ||

विद्यावान गुनी अति चातुर |

राम काज करिबे को आतुर || ७ ||

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया |

राम लखन सीता मनबसिया || ८ ||

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा |

विकट रूप धरि लंक जारवा || ९ ||

भीम रूप धरि असुर संहारे |

रामचंद्र जी के काज सवाँरे || १० ||

लाय सजीवन लखन जियाये |

श्री रघुबीर हरषि उर लाये || ११ ||

रघुपति किन्ही बहुत बड़ाई |

तुम मम प्रिय भारत-ही सम भाई || १२ ||

सहस बदन तुम्हरो जस गावै |

अस कही श्रीपति कंठ लगावे || १३ ||

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा |

नारद सारद सहित अहिंसा || १४ ||

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते |

कवि कोविद कहि सके कहाँ ते || १५ ||

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा |

राम मिलाय राज पद दीन्हा || १६ ||

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना |

लंकेश्वर भये सब जग जाना || १७ ||

जुग सहस्त्र जोजन पर भानु |

लिल्यो ताहि मधुर फल जानू || १८ ||

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही |

जलधि लाँघि गए अचरज नाही || १९ ||

दुर्गम काज जगत के जेते |

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते || २० ||

राम दुआरे तुम रखवारे |

होत ना आज्ञा बिनु पैसारे || २१ ||

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना |

तुम रक्षक काहु को डरना || २२ ||

आपन तेज सम्हारो आपै |

तीनों लोक हाँक तै कापै || २३ ||

भूत पिशाच निकट नहि आवै |

महावीर जब नाम सुनवै || २४ ||

नासै रोग हरे सब पीरा |

जपत निरंतर हनुमत बीरा || २५ ||

संकट तै हनुमान छुड़ावै |

मन क्रम वचन ध्यान जो लावै || २६ ||

सब पर राम तपस्वी राजा |

तिनके काज सकल तुम साजा || २७ ||

और मनोरथ जो कोई लावै |

सोई अमित जीवन फल पावै || २८ ||

चारों जुग परताप तुम्हारा |

है परसिद्ध जगत उजियारा || २९ ||

साधु संत के तुम रखवारे |

असुर निकंदन राम दुलारे || ३० ||

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता |

अस बर दीन जानकी माता || ३१ ||

राम रसायन तुम्हरे पासा |

सदा रहो रघुपति के दासा || ३२ ||

तुम्हरे भजन राम को पावै |

जनम जनम के दुःख बिसरावै || ३३ ||

अंतकाल रघुवरपुर जाई |

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई || ३४ ||

और देवता चित्त ना धरई |

हनुमत सेई सर्व सुख करई || ३५ ||

संकट कटै मिटै सब पीरा |

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा || ३६ ||

जय जय जय हनुमान गुसाईं |

कृपा करहु गुरु देव की नाई || ३७ ||

जो सत बार पाठ कर कोई |

छूटहि बंदि महा सुख होई || ३८ ||

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा |

होय सिद्ध सखी गौरीसा || ३९ ||

तुलसीदास सदा हरि चेरा |

कीजै नाथ ह्रदय मह डेरा || ४० ||

दोहा

पनय तनय संकट हरण, मंगल मूरति रूप |

राम लखन सीता सहित, ह्रदय बसहु सुर भूप ||


यज्ञ पर्यावरण की शुद्धि का सर्वश्रेष्ठ साधन है | यह वायुमंडल को  शुद्ध रखता है| इसके द्वारा वातावरण शुद्ध व रोग रहित रहता है| यज्ञ एक ऐसी ओषधि है जो सुगंध भी देती है, तथा वातावरण को रोग Continue reading


जीवन में शुभ के आगमन का प्रतिक है कमल पुष्प जानिए किस प्रकार माँ लक्ष्मी को घर में स्थाई रखने के लिए प्रसन्न करे

कमल का फूल जितना मन मोहक होता है उतनी ही मोहक उसकी सुगंध होती है जो वातावरण को शुद्ध व आनंद से भर देती है | कमल के फूल को हमारे शास्त्रों में भी बड़ा महत्त्व दिया गया है | हमारे धर्म शास्त्रों में  माँ लक्ष्मी को कमला और कमलासना माना जाता है | कमलासना का अर्थ होता है जो कमल पर विराजित हो कमल के फूल को माँ लक्ष्मी की पूजा में खास महत्त्व दिया गया है | आप माँ लक्ष्मी को कमल के फूल चढ़ा कर अपनी मनोकामना को पूरा कर सकते है और सफलता पा सकते है |जीवन में शुभ के आगमन का प्रतिक है कमल पुष्प जानिए किस प्रकार माँ लक्ष्मी को घर में स्थाई रखने के लिए प्रसन्न करे

कमल का फूल जितना मन मोहक होता है उतनी ही मोहक उसकी सुगंध होती है जो वातावरण को शुद्ध व आनंद से भर देती है | कमल के फूल को हमारे शास्त्रों में भी बड़ा महत्त्व दिया गया है | हमारे धर्म शास्त्रों में  माँ लक्ष्मी को कमला और कमलासना माना जाता है | कमलासना का अर्थ होता है जो कमल पर विराजित हो कमल के फूल को माँ लक्ष्मी की पूजा में खास महत्त्व दिया गया है | आप माँ लक्ष्मी को कमल के फूल चढ़ा कर अपनी मनोकामना को पूरा कर सकते है और सफलता पा सकते है |

इस प्रकार करे पूजन जिससे माँ लक्ष्मी सदा के लिए वास करे आपके घर :-

ज्योतिष के जानकारों की माने तो कमल का फूल देवी देवताओ को प्रिय होता है | इस फूल के उपयोग से आपकी कई मनोकामनाये पूरी हो सकती है |

* अगर आप अपने घर में माँ लक्ष्मी का स्थाई वास बनाना चाहते है तो इसके लिए एक नारियल ले  तथा एक लाल ,पीला, नीला और एक सफेद कमल के फूल से माँ लक्ष्मी की पूजा करे और फिर अगले दिन इन फूलो को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दे और पूजा में चढ़ाये गए नारियल को लाल कपडे में बांध कर तिजोरी में रख दे |

*अगर २७ दिन तक रोज एक कमल का फूललक्ष्मी जी को  अर्पित करे तो अखंड सुख की प्राप्ति होती है |

*किसी भी एक एकादशी को कृष्ण जी को कमल के दो फूल अर्पित करे ऐसा करने से आपकी संतान प्राप्ति की अभिलाषा पूरी होगी |

*कमल के फूल को माँ लक्ष्मी पूजा में खास महत्त्व दिया गया है अगर आप माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते है तो इनकी पूजा में कमल के फूल का इस्तेमाल करे |

*अपने परिवार के सदस्यो के बीच प्यार बढ़ाने के लिए अपने घर के मंदिर में स्थापित लक्ष्मी माँ की मूर्ति या तस्वीर के सामने एक कमल का फूल अर्पित करे | ऐसा करने से परिवार के लोगो के बीच प्यार बढ़ता है और साथ ही धन – सम्पत्ति बढ़ने लगती है |

*अगर आप अपने जीवन से धन की कमी को हमेशा के लिए दूर करना चाहते है तो माँ लक्ष्मी की नील रंग के कमल के फूल से पूजा करे आप इस फूल का इस्तेमाल किसी को वश में करने के लिए भी कर सकते है |


बैशाख माह हिन्दू नव वर्ष का दूसरा महीना होता है हिन्दू मान्यता अनुसार इस माह से त्रेता युग का आरम्भ हुआ था अत: सम्पूर्ण बैशाख माह अत्यधिक पवित्र और पुण्य Continue reading


प्रदोष काल निर्धारित करने की ३ प्रचलित मान्यताये है-

जिनका आप अपने क्षेत्र और रीती अनुसार अनुसरण करे |

एक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल सूर्यास्त के समय से आगे चार घटी अथार्त ९६ मिनिट का होता है |

दूसरी मान्यता के अनुसार सूर्यास्त्र के समय से दूसरे दिन के सूर्य उदय Continue reading