किस प्रकार पहचाने अपने अंदर छुपे राजयोग के लक्षण को

ज्योतिष विद्या जिसके द्वारा किसी भी व्यक्ति के स्वभाव को समझने तथा उनके भविष्य के रहस्य को सुलझाने में प्रयोग होता है। मनुष्य के जन्म के समय और उस तिथि के द्वारा उसके कुंडली का निर्माण किया जाता है। हस्तरेखा के द्वारा भी किसी व्यक्ति के वर्तमान को समझा जा सकता है। ऐसे ही भारतके प्राचीन विद्याओं में एक और विद्या है समुद्र शास्त्र। आइये आज हम जानते हैं किस प्रकार व्यक्ति के शारीरिक बनावट, शरीर में स्थित चिन्ह या उसके हाव-भाव से उस व्यक्ति के भविष्य और उसका वर्तमान जान सकते हैं।

 

१) समुद्र शास्त्र:

एक ऐसा शास्त्र जिसके द्वारा ना सिर्फ व्यक्ति के भविष्य की सच्चाई का पता लगाया जा सकता है वल्कि उसके शरीर में मौजूद चिन्हों के द्वारा उस व्यक्ति के किस्मत में राजयोग का पता लगाया जा सकता है। समुद्र शास्त्र के रचनाकार महर्षि समुद्र ने कहा था की जिस मनुष्य के पैर के तलवे में कुण्डल, अंकुश या चक्र का चिन्ह होता है वो संसार का अच्छा शासक होता है और राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है।

२) जातक भरण ग्रन्थ:

  • इसके अनुसार यदि किसी व्यक्ति के हाथ या पैरों में हस्त, छत्र, मछली, वीणा या अंकुश का निशान हो वह व्यक्ति सबसे श्रेष्ठ होता है। यदि किसी व्यक्ति के हथेली के बीचों-बीच शक्ति, तोमर, रथ, ध्वजा या बाण हो तो ऐसे व्यक्ति को शासन करने का अवसर मिलता है।
  • ऐसे मनुष्य जिनके पैरों में कमल, आसन का निशान हो तो उसे सभी सुख-सुविधाओं का सुख प्राप्त होता है। उसके घर में हमेशा माँ लक्ष्मी का वास होता है।
  • जिस मनुष्य के हथेली के बीचों-बीच यदि तिल का निशान हो तो ऐसे लोग बहुत धनवान होते हैं और वो समाज आदरणीय होते हैं।

 

भाग्य रेखा: भाग्य रेखा जो मध्यमा अंगुली से लेकर मणिबधं तक फैली होती है। यदि ये रेखा स्पष्ट और अखंडित हो तो ऐसे मनुष्य सभी प्रकार के सांसारिक सुखों को प्राप्त करते हैं।

 

पंच महापुरुष योग:

समुद्र शास्त्र में पांच तरह के योग हैं, जो इंसान की किस्मत का निर्धारण करता है।

रुचक योग:

यह योग मंगल से बनने वाला योग है जिसमें जन्म लेने वाला मनुष्य दिखने में निर्मल और लम्बे शरीर का होता है। तथा वो बलवान, सहस से भरा हुआ, सुन्दर और अपने सभी कर्तव्यों को निभाने वाला होता है। ये स्वभाव में क्रूर होते हैं लेकिन अपने गुरु व् ब्राह्मण का आदर करते हैं।

शशक योग:

ऐसे व्यक्ति जिनके जन्म समय में शनिकृत शशक योग बनता है वो बहुत साहसी, किसी भी वन या पर्वत में विचरण करने वाला होता है। इनके कद थोड़े छोटे होते हैं और देह कोमल। ये अपने किसी भी काम को करने में सक्षम होते हैं। उनके अंदर देश प्रेम जागृत रहता है। इनकी बुद्धि तीव्र होती है।

मालव्य योग:

शुक्रकृत मालव्य नामक महापुरुष योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति जिसके होठ और कमर पतली, शरीर में चंद्रमा के समान चमकदार देह, लंबी नाक, सफेद दांत और घुटने तक लंबे हाथ होते हैं उसकी उम्र करीब 70 साल होती है।

हंस योग:

देव गुरु बृहस्पति कृत हंस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति कद में ऊंचा होता है और उसकी नाक भी काफी लंबी होती है। इनकी आवाज काफी मधुर होती है। ये लोग शारीरिक संबंधों को अपना जीवन समझते हैं और कभी एक व्यक्ति से संतुष्ट नहीं होते।

भद्रयोग:

बुध कृत भद्रयोग में जन्म लेने वाला व्यक्ति शेर के समान साहसी और मुखवाला होता है। ऐसे व्यक्तियों की छाती काफी चौड़ी और भुजाएं बहुत लंबी होती हैं। इनका देह कामुक होता है और बाल बहुत मुलायम होते हैं। ऐसे लोग स्वभाव से बेहद गंभीर माने जा सकते हैं। ऐसे लोग अपने निकट सम्बन्धियों और परिवार को हमेशा प्रसन्न रखते हैं। इस योग के साथ जिस व्यक्ति के हाथों और पैरों में शंख, तलवार, हाथी, गदा, पुष्प, बाण, झंडा, या कमल के निशान हो तो ऐसे व्यक्ति ८० वर्हों तक जीवित रहते है।

 

*  लेकिन ये पंच योग जो जन्म कुंडली में दिखाई देते हैं वो तब तक सिद्ध नहीं होता जब तक बताये गए राजयोग के लक्षण शारीरिक अंगों और उसकी बनावट पर ना दिखाई दें।

 

ये समस्त जानकारियां शास्त्र के अनुसार है|

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