महाभारत जिसमे वासुदेव भगवान श्री कृष्ण ने हमे गीता का ज्ञान दिया| इस गीता मे जितनी भी बाते लिखी गयी हैं जिनमें जीवन की हर समस्या का समाधान छिपा है। हम आपको गीता मे से ऐसी 10 बाते बताते है जो आपको हर मुसीबत मे आपकी मदद करेगी|

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माँ सरस्वती ज्ञान और संस्कृति की देवी है जिनकी पूजा धर्म ग्रंथो के अनुसार माघ मास के शुक्ल  पक्ष की पंचमी मे मनाया जाता है जिसे बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है| इस साल ये पर्व १२ फ़रवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा| ग्रंथो के अनुसार वसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा करने से माँ सरस्वती बहुत प्रसन होती है और विधया, बुद्धि और सुख-शांति प्रदान करती है|
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हिमाचल प्रदेश मे एक छोटे से जिला कांगरा जिला है जहाँ बहुत प्राचीन धार्मिक अस्थल है जो आनोखे शिवलिंग के कारण प्रचलित है|यहाँ काठगढ़ महादेव मंदिर है जहाँ शिवलिंग अर्धनारीश्वर रूप में है जो शिव और पार्वती मे बटा है| ये अपने आप दो भागो मे विभक्त होते है और खुद ही मिल जातें है|

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जीवन मे खुश न होने का मुख्य कारण मन की अशांति है हम आज एक साधारण प्रसंग के द्वारा समझेगे की किस तरह हम ध्यान के द्वारा अपने मन को शांत कर सकते है |

महात्मा बुद्ध जी अपने एक शिष्य के साथ वन में भ्रमण करते हुए कहीं जा रहे थे। बहुत दूर तक चलने से वे दोनों थक गए और वो दोपहर में एक पेड़ के नीचे आराम के लिए रुक गये | उन्हें प्यास भी लग रही थी। वहां निकट ही एक पहाड़ी स्थित थी, वहा एक झरना भी था।

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शास्त्रो मे बताया गया है की गाय इस सृष्टि का सर्वोत्तम एवम् पूज्य प्राणी है तथा गाय की महत्वता, उपादेयता, आवश्यकता आध्यात्मिक, धार्मिक तथा वैज्ञानिक दृष्टि से सर्वविदित है। यदि हम व्यवहारिक रुप में  प्रतिदिन गाय की सेवा करते हैं तो उसको बहुत आश्चर्यचकित करने वाले सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते है, बहुत सी आयुर्वेदिक औषधि है जो गौ मूत्र से ही बनाई जाती है और कई गंभीर बीमारिओ की चिकित्सा मे बहुत लाभप्रत होती है |

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हम किससे उदास होते है | हम पक्षियों, या बादलों, या प्रकृति से उदास नही होते है। हम पर्यावरण के साथ परेशान नहीं होते है। तो, क्या है जो हमे उदास या परेशान करता है?

हम हमारे आसपास के लोगों के साथ परेशान होते है | हम अपने दुश्मनों से परेशान होते है और अपने मित्रो से भी परेशान हो सकते है | हमारा मन या तो हमारे दोस्तों में या हमारे दुश्मनों में अटक जाता है। हम या तो अपने दोस्तों के बारे में या अपने दुश्मन के बारे में पूरे दिन सोचते रहते है |

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कुंभ मेले के उत्सव के विभिन्न राशियों में सूर्य और बृहस्पति की स्थिति के अनुसार चार पवित्र स्थानों में मनाया जाता है |

पूर्ण कुंभ १२ साल मे एक बार उज्जैन मे आयोजित किया जाता है जब राशि चक्र हस्ताक्षर पर वृश्चिक राशि, बृहस्पति और सूर्य की उपस्थिति दर्शाती है | उज्जैन मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में शिप्रा नदी के किनारे पर स्थित है और भारत में सबसे पवित्र स्थानों में से एक के रूप में देखा जाता है। यह शहर बड़े गणेशजी का मंदिर, महाकालेश्वर, विक्रम कीर्ति मंदिर और कई अन्य के रूप में कई धार्मिक स्थलों से समृद्ध है।

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मनुष्य को शांति और आनंद का अनुभव तभी हो सकता है जब कि वह अपने आप को सत्ता सामान्य मे स्थित कर लेता है | जब तक मनुष्य विकारवान नाना पदार्थो मे अपना अहनभाव रखता है तब तक उसे शांति और परमानंद की प्राप्ति नही हो सकती | इस विषय पर वासिष्ठ जी ने रामचंद्र जी ने उपख्यन सुनाया जो इस प्रकार है –
गंदमादन पर्वत पर उद्धालक नाम का एक युवक मुनि वास करता था | एक समय उसके मान मे यह विचार उत्पन्न हुया की अभी तक उसको शांति और आनंद का अनुभव नही हुया उसके लिए प्रयत्न करना चाहिए, क्योकि मनुष्य जीवन का परम उद्देश् वही है | इंद्रियो के भोग भोगने से मनुष्य को कभी तृप्ति नही हो सकती |

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हर व्यक्ति मन की शांति चाहता है, लेकिन यह एक व्यक्ति के लिए मुश्किल है की वह मानसिक संतुलन की ऐसी हालत प्राप्त कर ले जो उसे शांति का जीवन व्यतीत करने दे| मन की शांति हम सभी के लिए एक दूर का स्वप्न है। इसका कारण क्या है? आदर्श शांति के बाद लोगों के लालायित होने का कारण यह है की वो शुद्ध शांति-एक गैर-शांति की वस्तुओं के सभी प्रकार से मुक्त है |

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मंगल दोष एक अक्सर पाया जाने वाला ज्योतिषीय दोष है। मंगल ग्रह प्राचीन संस्कृत भाषा में मंगल या खुज के रूप में जाना जाता है। यदि मंगल ग्रह किसी व्यक्ति की कुंडली चार्ट के 1, 2, 4, 7, 8 और 12वें स्थान या घर में मौजूद हो तब इस ज्योतिषीय स्थिति को  आमतौर पर मंगल दोष के रूप में कहा जाता है | वो लोग जिनको यह दोष है उन्हे. मांगलिक के रूप में जाना जाता है।

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गंगा नदी का उल्लेख बड़े पैमाने पर वेद, पुराणों, महाकाव्यों रामायण और महाभारत में किया है|

राजा बलि एवं गंगा मा

भगवान विष्णु समय समय पर इस प्रथ्वि पर १० अवतारो है मे प्रकट होते रहे है| अलग अलग अवतारो मे वो हर बार दुष्ट पपियो से हमारी रक्षा करते आए है| इन्ही अवतारो मे से एक था ब्रम्हिन अवतार जिसमे वो बोने ब्रम्हन के रूप मे प्रथ्वि पर प्रकट हुए थे|
बलि चक्रवर्ती बहुत ही शक्तिशाली एवं धनवान राक्षस राजा था| साथ ही साथ वो भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त भी था| उसकी दिन पे दिन बढ़ती शक्ति को देखकर इंद्र देव भी घबराने लगे की कही उनकी स्वर्ग की सत्ता ना चली जाए| इंद्र भगवान विष्णु के पास मदद माँगने पहुच गये|

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