28 जून स्कन्द षष्ठी का दिन, इस प्रकार करें भगवान कार्तिकेय की उपासना

स्कन्द अर्थात भगवान कार्तिकेय जिनकी पूजा दक्षिण भारत में की जाती है। इन्हें दक्षिण भारत में मुरुगन स्वामी के नाम से भी जाना जाता है। कल अर्थात 28 जून को स्कन्द षष्ठी है। षष्ठी तिथि भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। इसलिए आज हम जानेंगे किस प्रकार स्कन्द षष्ठी की उपासना की जाती है।

उपासक शुक्ल पक्ष षष्ठी के दिन उपवास रखते हैं और उनकी पूजा करते हैं। यह व्रत प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को किया जाता है। वर्ष के किसी भी मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को यह व्रत आरंभ किया जा सकता है। लेकिन सामान्यतः यह व्रत चैत्र अथवा आश्विन मास की षष्ठी को शुरू करना अधिक उत्तम माना जाता है।

 

इस व्रत में उपयोग होने वाली सामग्री:

इस व्रत के लिए भगवान शालिग्राम का विग्रह, भगवान कार्तिकेय का सुन्दर चित्र, नारियल, तांबे का लोटा, तुलसी का पौधा(जो गमले में लगा हो), पूजन सामग्री: जैसे- कुमकुम, अक्षत, हल्दी, चन्दन, अबीर, गुलाल, दिया, घी, इत्र, फूल, फल, दूध, जल, मेवा, मौली धागा, आसन इत्यादि।

 

पूजा:

इस व्रत में माँ पार्वती और भगवान शिव की पूजा होती है। इस दिन मंदिरों में विशेष रूप से पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन स्कन्द देव अर्थात(कार्तिकेय) की स्थापना करके उनकी पूजा की जाती है और अखंड दीप प्रज्वलित किया जाता है। सभी भक्तों के द्वारा स्कन्द षष्ठी महात्म्य का नित्य पाठ किया जाता है। भगवान को स्नान कराया जाता है, नए वस्त्र धारण कराये जाते हैं। तांत्रिक इस दिन तंत्र साधना भी करते हैं। इस दौरान मांस, शराब, लहसुन, प्याज इन सबका त्याग करना जरुरी है। और ब्रह्मचर्य का संयम रखना जरुरी होता है।

 

लाभ:

  • व्रत विधिपूर्वक करने से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है।
  • संतान पे आ रही सभी कष्टों और रोगों नाश होता है।